लेखक द्वारा नाखूनों को अस्त्र के रूप में देखना कहां तक संगत है? Lekhak Dwara Nakhunon Ko Astra Ke Roop Mein Dekhna Kahan Tak Sangat Hai?
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लेखक द्वारा नाखूनों को अस्त्र के रूप में देखना कहां तक संगत है? Lekhak Dwara Nakhunon Ko Astra Ke Roop Mein Dekhna Kahan Tak Sangat Hai?

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जब मनुष्य जंगली था, तब उसे नाखून की आवश्यकता थी। उसकी जीवन रक्षा के लिए नाखून बहुत जरूरी थे।

असल में वही उसके अस्त्र थे। उन दिनों उसे जूझना पड़ता था, को पछाड़ना पड़ता था, प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ना पड़ता था। अतः नाखून उसके लिए आवश्यक अंग था।

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