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प्रतिहार वंश के बारे में लिखें। Or, Pratihar Vansh Ke Bare Mein Likhen.

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विद्वानों के अनुसार प्रतिहार गुर्जरों के वंशज थे, इसलिए इन्हें गुर्जर प्रतिहार भी कहते हैं। नागभट्ट प्रथम गुर्जर प्रतिहार वंश का संस्थापक था।

इसकी आरंभिक राजधानी भनीमाल में थी। नागभट्ट द्वितीय यह पाल शासक धर्मपाल की सेना को मुंगेर के समीप पराजित किया।

इसने कन्नौज को अपनी राजधानी बनाया। लेकिन वह राष्ट्रकूट नरेश गोविंद तृतीय से पराजित हो गया। महिरभोज प्रथम इस वंश का सबसे महत्वपूर्ण शासक था।

इसने कन्नौज को पुनः अपनी राजधानी बनाया। वह अपने समकालीन राजाओं पाल शासक देव पाल एवं राष्ट्रकूट शासक ध्रुव से पराजित हुआ।

 मिहिरभोज वैष्णव मतावलंबी था और उसने आदीवराह और प्रभास जैसी उपाधि धारण की। इसका महत्वपूर्ण लेख (प्रशस्ति) ग्वालियर से मिला है।

महेंद्रपाल प्रथम ने प्रतिहार साम्राज्य को अक्षुण बनाए रखा। उस के दरबार में राजशेखर निवास करते थे जो उसके राजगुरु भी थे।

अलमसूदी जो 1915-16 में बगदाद से भारत आया, ने प्रतिहार शासकों की शक्ति एवं प्रतिष्ठा का वर्णन किया है। वह  प्रतिहार राज्य को जुज्र  कहता है।

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