सविनय अवज्ञा आंदोलन का वर्णन करें। Savinay Avagya Andolan Ka Varnan Karen
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सविनय अवज्ञा आंदोलन का वर्णन करें। Savinay Avagya Andolan Ka Varnan Karen.

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सविनय अवज्ञा आंदोलन के निम्नांकित कारण थे —

  • 1930 के पूर्व भारत का राजनीतिक वातावरण उद्वेलित था। साइमन कमीशन के आगमन तथा नेहरू रिपोर्ट के अस्वीकृत होने से व्यापक क्षोभ की स्थिति थी।
  • क्रांतिकारी गतिविधियों में वृद्धि हो रही थी।
  • काँग्रेस का युवा वर्ग पूर्ण स्वराज की माँग कर रहा था।
  • आर्थिक मंदी के प्रभाव से भारत में गरीबी और बेरोजगारी बढ़ रही थी और लोगों का असंतोष और आक्रोश बढ़ रहा था। इन्हीं परिस्थितियों के कारण गाँधीजी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन आरंभ किया।

सविनय अवज्ञा आंदोलन का स्वरूप 

12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से दांडी यात्रा आरंभ कर 6 अप्रैल को गाँधीजी ने नमक कानून भंग किया।

आंदोलन के दौरान जगह-जगह नमक कानून भंग किया गया। हड़तालें रखी गईं। लगानबंदी आंदोलन किया गया। सरकारी नौकरी, शिक्षण संस्थाओं और विदेशी वस्त्र का बहिष्कार किया गया।

आंदोलन में समाज के विभिन्न तबकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पहली बार महिलाओं ने भी इस आंदोलन में भाग लिया।

5 मार्च 1931 को गाँधी-इरविन समझौता के बाद गाँधीजी ने आंदोलन वापस ले लिया।

द्वितीय गोलमेज सम्मेलन की विफलता के बाद 1932 में पुनः आंदोलन आरंभ हुआ, परंतु तृतीय गोलमेज सम्मेलन की विफलता के बाद इसे वापस ले लिया गया।

सविनय अवज्ञा आंदोलन का  प्रभाव

  • आंदोलन से राष्ट्रीय आंदोलन का सामाजिक आधारविस्तृत हुआ। समाज के सभी वर्गों ने इसमें भाग लिया।
  • बहिष्कार की नीति से ब्रिटिश आर्थिक हितों को भारी क्षति हुई।
  • संवैधानिक सुधारों के प्रयास तेज कर दिए गए जिससे 1935 का भारत सरकार अधिनियम पारित हुआ।
  • भारतीय स्वतंत्रता संग्राम एक कदम आगे बढ़ गया।

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